अश्वगंधा पुरुष यौन शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने वाली चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि

अश्वगंधा सफेद रंग की नन्ही-नन्ही लकड़ियों जैसी होती है। यह स्त्री, पुरुष, बच्चे, बूढ़े और जवान—सभी के लिए हर अवस्था में लाभकारी और शक्तिवर्धक औषधि है। अश्वगंधा उन विलक्षण जड़ी-बूटियों में से एक है, जिनके प्रभाव को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार कर रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधानों ने इसके बेशकीमती गुणों को प्रमाणित किया है, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ गई है। इसे एक अत्यधिक प्रभावी बलवर्धक औषधि माना जाता है।

अश्वगंधा के अद्भुत लाभ

पाचन और रक्तवर्धक गुण
अश्वगंधा की जड़, तना और फल में प्रोटीन पचाने वाला एंजाइम (कैमेस) पाया जाता है। यह आयरन के साथ मुक्त अमिनो अम्लों से युक्त होती है, जिससे यह एक बेहतरीन रक्तवर्धक औषधि बन जाती है।

शक्ति और स्वास्थ्य में वृद्धि
आयुर्वेद में इसे ताकत और स्वास्थ्य बढ़ाने वाला तथा बुढ़ापे को रोकने वाला रसायन माना गया है।

कमजोरी और पाचन संबंधी विकारों में लाभकारी
अश्वगंधा शक्ति बढ़ाने वाली श्रेष्ठ औषधि है। यह पाचन में हल्की होती है, इसलिए दस्त, संग्रहणी, पेचिश, क्षय और शुक्राणु की कमी से पीड़ित रोगियों के लिए भी लाभकारी होती है।

वीर्यवर्धक और बलवर्धक
अश्वगंधा को वीर्यवर्धक, बल्य और रसायन औषधि माना जाता है।

पौरुष शक्ति में वृद्धि
पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए अश्वगंधा चूर्ण का सेवन किया जाता है।

उचित मात्रा और सेवन विधि
अश्वगंधा की अधिकतम मात्रा 10-12 ग्राम है। इसे सुबह और रात को सोने से पहले एक गिलास मीठे और गर्म दूध में मिलाकर लेना चाहिए।

दुर्बलता दूर करने में सहायक
अश्वगंधा चूर्ण की 5 ग्राम खुराक प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ 60 दिन तक लेने से शारीरिक कमजोरी, थकान और निर्बलता दूर होती है।

शारीरिक बल और ओज में वृद्धि
इसके नियमित सेवन से शरीर मजबूत और ऊर्जावान बनता है।

यौन शक्ति बढ़ाने में सहायक
शिश्न की शिथिलता दूर करने के लिए चमेली के तेल में बारीक पिसा हुआ अश्वगंधा मिलाकर धीरे-धीरे मालिश करने से उत्तेजना में वृद्धि होती है।

बांझपन में लाभकारी
बांझपन (बंधत्व विकार) से राहत पाने के लिए अश्वगंधा को गिलोय के दूध में गर्म करके पीना चाहिए।

सर्दियों में विशेष रूप से लाभकारी
शीत ऋतु में अश्वगंधा चूर्ण को प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ लेने से अधिक लाभ होता है। यह शरीर के सभी तंत्रों को मजबूती प्रदान करता है।

स्तनों को आकर्षक बनाने में सहायक
अश्वगंधा को सरसों के तेल में मिलाकर तैयार किए गए तेल की मालिश स्तनों पर करने से वे सुडौल और आकर्षक बनते हैं।

शीघ्रपतन से राहत
शीघ्रपतन से छुटकारा पाने के लिए अश्वगंधा चूर्ण में मिश्री मिलाकर गुनगुने दूध के साथ लेना चाहिए। रात में सोने से चार घंटे पूर्व भोजन करें

मानसिक तनाव और अनिद्रा में लाभकारी
अश्वगंधा 2 ग्राम को घी और शक्कर के साथ मिलाकर खाने से मानसिक तनाव और अनिद्रा में राहत मिलती है।

नेत्र ज्योति बढ़ाने में सहायक
अश्वगंधा चूर्ण, मुलेठी चूर्ण और आंवले के रस को मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से 6-7 महीनों में नेत्र ज्योति में सुधार होता है।

निष्कर्ष

अश्वगंधा को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप संपूर्ण स्वास्थ्य और शक्ति प्राप्त कर सकते हैं। यह एक प्राकृतिक औषधि है जो बिना किसी साइड इफेक्ट के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है

नोट: किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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