हर साल डेंगू दुनिया भर में इसके बुखार का अगर अनुमान लगाया जाए तो 10 करोड़ मामले सामने आते हैं डेंगू का सबसे ज्यादा खतरा भारत में एशिया और दक्षिण चीन में होता है डेंगू एक मच्छर के काटने से होता है तथा फैलने वाली बीमारी है जो लेडिस मादा मच्छर द्वारा फैलती है
डेंगू वायरस के चार प्रकार होते हैं इसमें से किसी भी एक से संक्रमित होने पर डेंगू हो सकता है इस वायरस से बचने के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है सबसे ज्यादा अच्छा तरीका मच्छरों के काटने से बचाना है अगर डेंगू से बचाना है तो मच्छरों का संपूर्ण तरीके से काटने से बचना चाहिए
संक्रमण होने पर जल्दी पहचान करना चाहिए और सही इलाज सही समय पर बहुत जरूरी है गंभीर बीमारी की संभावना को काफी हद तक काम कर सकते हैं अगर डेंगू का पता जल्दी लग जाए तो,
डेंगू का बुखार एक बहुत ही ज्यादा दर्दनाक और कमजोर कर देने वाली बीमारी है डेंगू जो मच्छरों के द्वारा फैलने वाले डेंगू वायरस से होती है इसके लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के तीन से 14 दिन बाद दिखने लगते हैं यह बुखार छोटे बच्चों में युवाओं में और वयस्कों को भी प्रभावित करता है|
डेंगू होने पर सबसे पहले देखने मिलता है कि जोड़ों में बहुत ज्यादा दर्द होता है और बुखार तेज आता है आंखों में भी जलन होती है और इसके साथ-साथ ही सर में बहुत ज्यादा दर्द होता है|
Contents
डेंगू बुखार के लक्षण:
यह बीमारी मादा एडीज मच्छर के काटने से होती है
यह मच्छर दिन में काटता है
यह साफ और स्थिर हुए पानी में ही अंडे देता है
हमारे आसपास अगर किसी भी जगह पर पानी एकत्रित हो रहा है और वह साफ है उसी जगह पर ही यह मच्छर पनपना लगता है और अंडे देने लगता है इन्हीं की वजह से डेंगू फैलने लगता है
डेंगू बुखार के लक्षण :
अचानक तेज बुखार आने लग जाती है तो समझ लेना चाहिए कि डेंगू के भी लक्षण हो सकते हैं (105 डिग्री)
अगर बुखार के साथ-साथ सर में भी तेज दर्द शुरू हो जाए और असहनीय सर दर्द शुरू हो जाए तो यह डेंगू के लक्षण हो सकते हैं
आंखों के पीछे दर्द होना
जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द होने लग जाता है अगर डेंगू होने वाला है तो अधिकतर हड्डियों में और जोड़ों में तेज दर्द चलने में असमर्थता पैरों के पिंडलियों में ऐंठन होने लग जाती है
मतली होना
उल्टी जैसा लगना या उल्टी का होना
त्वचा पर लाल चकत्ते आने लग जाना बुखार शुरू होने के तीन से चार दिन बाद ही शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई देना या पीठ पर लाल चकत्ते दिखाई देना यह डेंगू के कुछ लक्षण दिखने लग जाते हैं
हल्का रक्त का स्राव होना जैसे नाक से खून आना मसूड़े से खून आना या आसानी से नीला पड़ जाना यह कुछ ऐसे लक्षण जिन्हें देखने के बाद हमें समझ आने लग जाता है कि यह डेंगू के लक्षण है
थकान बहुत ज्यादा होने लगना
दस्त होने लगना
कभी-कभी डेंगू बुखार के जो लक्षण होते हैं वह काम होते हैं और यह फ्लो या किसी और वायरल इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं छोटे बच्चों और जिन लोगों को कभी भी इन्फेक्शन नहीं हुआ होता है उनमें बड़े बच्चों और वयस्कों के मुकाबले में हल्के मामले होते हैं जबकि उनमें ज्यादा समस्या बढ़ जाती है जिनमें डेंगू में रक्त बहने लगता है बुखार तेज आने लगता है लिंफ और ब्लड वेसल्स को नुकसान नाक और मसूड़े से खून बहने लगता है लीवर बढ़ने लग जाता है और सर्कुलेटरी सिस्टम इन सभी चीजों के फेल होने की समस्या शामिल हो जाती है अगर लक्षण बड़े स्तर पर है और रक्त स्राव ज्यादा हो रहा है तो कभी-कभी सदमा कॉम और मृत्यु में बदल जाते हैं इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है|
जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है या डेंगू दूसरी बार हो रहा होता है तो ऐसे संक्रमण वाले लोगों को डेंगू रक्त शराबी बुखार होने का अधिक खतरा माना जाना चाहिए|
तेज डेंगू बुखार तब होता है जब ब्लड ब्लड वेसल्स फटने लग जाती हैं और उनमें से सेक्रेटिशन होने लग जाते हैं और ब्लड सर्कुलेशन में थक्का बनाने वाली प्लेटलेट्स जो जिन्हें कहा जाता है उनकी संख्या कम होने लग जाती है और उनके टूटने की वजह से अंदर की तरफ ब्लू बहाने लग जाता है और पतला हो जाता है जिस अंग फेल हो जा हो सकते हैं यहां तक की death भी हो जाती है|
अगर आपने अभी-अभी किसी ऐसे शहर या क्षेत्र से आए हैं जहां पर डेंगू बुखार से पीड़ित लोग थे और आपको बुखार हो गया है तो आप किसी भी इनफॉरमेशन के लक्षण से ग्रसित है तो तुरंत ही अपने चिकित्सक से परामर्श लें|
गर्भावस्था में डेंगू खतरनाक!
जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान डेंगू बुखार हो जाता है वह डिलीवरी के बाद बच्चे को वायरस फैलाने में सक्षम रहती है इसके अलावा जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान डेंगू बुखार हो जाता है उनके बच्चों में समय से पहले जन्म जन्म के समय वजन या भ्रूण संकट का खतरा अधिक होता है इस स्थिति में मां और बच्चे दोनों की मृत्यु भी हो सकती है|
डेंगू बुखार का डायग्नोसिस:
डेंगू बुखार का डायग्नोसिस ब्लड टेस्ट द्वारा किया जाता है जब हम ब्लड टेस्ट करते हैं वह हमारी नस के माध्यम से ब्लू का सैंपल लगा और डेंगू वायरस के लक्षण की टेस्ट के लिए उसे लैब में भेजेगा इससे यह भी पता चल जाता है की आपको चार में से कौन से प्रकार का है टेस्ट करने के बाद जब सभी टेस्ट हो जाते हैं और बाकी टेस्ट से भी अन्य लक्षणों की जांच हो जाती है जो समान लक्षण पैदा करते हैं|
डेंगू होने पर हमें कौन-कौन से टेस्ट या जांच करनी चाहिए जिससे पता चल जाए कि डेंगू हुआ है या नहीं:
CBC- complete blood count-बीमारी होने के बाद या बुखार आने के बाद या इनमें से जितने भी लक्षण दिख रहे हैं यह देखने के बाद हमें सबसे पहले सीबीसी या जिसे क्या कहा जाता है कंप्लीट ब्लड काउंट यह टेस्ट करना चाहिए इसमें हमें देखने में मिलता है प्लेटलेट काउंट की जांच करते हैं अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हो रहे हैं या गिर रहे हैं टूट रहे हैं तो डेंगू हो सकता है हिमोग्लोबिन पता कर सकते हैं आरबीसी की संख्या पता कर सकते हैं जो एनीमिया का सबूत होती है इन सभी कमी को पता लगाने के लिए डेंगू से जुड़े खून की कमी के साथ यह जांच होती है
डेंगू सेरोलॉजी टेस्ट इसमें IgG और IgM यह जांच किसी के संपर्क में आने के चार दिन बाद कराई जाती है इसमें एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है|
Dengu virus antigen detection (NS1) यह डेंगू के फैलने से हुए इन्फेक्शन की जांच के लिए जो शुरुआती दिनों में देखने को मिलती है तथा इन्फेक्शन के बाद 1 से 2 दिन के अंदर किया जाता है|
📝LFT(liver function test)
📝RFT(renal function test)
📝Chest x- ray
📝ECG(electro cardio gram)
📝USG(ultra sonography)
✅डेंगू वायरस से संक्रमित होने पर प्लेटलेट्स की संख्या कम से कम जो स्तर पहुंच सकती है 40,000 प्लेटलेट्स /माइक्रो लीटर से कम हो सकती है और यह स्तर धीरे-धीरे गिरता जाता है
डेंगू बुखार का इलाज :
वैसे तो डेंगू बुखार के लिए कोई भी दवाई नहीं बनी हुई है पर उनके लक्षणों को काम करके धीरे-धीरे आराम मिल सकता है जैसे कि अगर आपको पेशाब कम हो रहा है, मुंह सूख रहा है ,या होंठ सूख रहे हैं , सुस्ती या थकान बहुत ज्यादा लग रही है, ठंडा या चिपचिपा हाथ पर हो रहे हैं ,और अगर यह ऐसे लक्षण कुछ दिखाई देते हैं तो डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए|
सबसे पहले अगर हमें कुछ लक्षण दिखते हैं और प्लेटलेट काउंट्स अगर बढ़ाने हैं तो सबसे पहले सबसे अच्छा तरीका है कि अपने खाने में ऐसे खाद्य पदार्थ को शामिल करना चाहिए जो प्लेटलेट्स को बढ़ा सकते हैं जैसे कि पपीते के पत्तों का रस पी सकते हैं हरी सब्जियां पत्तेदार खा सकते हैं आयरन से भरा हुआ भोजन ले विटामिन सी और विटामिन जी खाद पदार्थ में अच्छे से हो वह ले सकते हैं यह प्लेटलेट काउंट को धीरे-धीरे बढ़ने लग जाते हैं ज्यादा से ज्यादा हो सके तो नारियल पानी पीना चाहिए यह शरीर में पानी की कमी होने से बचाता है|
प्लेटलेट्स जब गिरने लगते हैं तब thrombocytopenia नाम की स्थिति हो जाती है
डेंगू बुखार की रोकथाम कैसे करें:
डेंगू से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका है सबसे पहले मच्छरों के काटने से खुद को बचाना |
1. घर के आसपास पानी को रुकने से बचाना चाहिए
2. मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए
3.जब भी बाहर हो फुल या लंबी आस्तीन वाले कपड़े का इस्तेमाल करें
4.बाहरी पक्षी या जानवरों के पानी को बदलते रहना चाहिए
5.अगर आपके घर में किसी को डेंगू बुखार होता है तो मच्छरों से खुद को ओर बाकी घरवालों को बचाना बेहद जरुरी है
6.बुखार तेज आने पर और जो लक्षण दिखे उसमें तो सबसे पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें
7.पानी की मात्रा बढ़ाए
8.रोज़ नारियल पानी पिए
🛑 बुखार थोड़ा कम होने के बाद पहले 24 घंटे में अगर आपको ऐसा लगता है कि बुखार उतर नहीं रह है या बार बार बुखार ओर बाकी लक्षण दिखने हैं तो आपको डेंगू बुखार की जांच जल्द से जल्द करना हैं और तुरंत अस्पताल जाना है |