Contents
क्या आप गर्भवती हैं?
जिस पल एक स्त्री को पता चलता है कि वह गर्भवती है वह पल उसके जीवन का अमूल्य पल बन जाता है वैसे तो मासिक धर्म की तारीख निकल जाने पर या उसे तारीख से ज्यादा और 8-10 दिन गुजर जाने पर यूरिन टेस्ट जिसे (UPT-Urine pregnancy test) करवाने से आसानी से पता किया जा सकता है कि स्त्री गर्भवती है या नहीं|
इसका मतलब है, मितली जैसा लगना|कभी कभी चक्कर जैसा महसूस होना|मन न लगना |बेचैनी सा महसूस होना|सीने में या गले में जलन महसूस होना|heart beats का बढ़ जाना|किसी खास चीज की महक से उल्टी जैसा या उबकाई आना|यह जरूरी नहीं कि ये लक्षण सभी महिलाओं को होते हो ये लक्षण ज़्यादातर उन महिलाओ में देखने मिलते हैं जिनकी पहली गर्भावस्था है|
गर्भवती का आहार
गर्भावस्था के इन 9 महीना के दौरान जो गर्भवती स्त्री है उसको क्या खाना चाहिए क्या पीना चाहिए इसके बारे में आयुर्वेद में बहुत ही विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है जैसे कहा जाता है कि छठवें महीने में शिशु की बुद्धि का विकास होता है ऐसे समय में यदि गर्भवती स्त्री खाने में बादाम अखरोट को मिलाकर ले यह वह गणित या किसी पजल का अभ्यास करें तो जो आने वाला शिशु है उसके अंगों पर जो विकसित हो रहे हैं बहुत ही अच्छा प्रभाव देखा जाता है कहा जाता है कि गर्भावस्था के दौरान स्त्री क्या देखती है क्या खाती है क्या पढ़ती है क्या सोचती है इसका बच्चे पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है|
1.सबसे पहले बात करते हैं कि गर्भवती स्त्री को पानी किस प्रकार पीना चाहिए तो कम से कम 15 से 20 मिनट तक उबला हुआ पानी पीना चाहिए दिन में नारियल का पानी धनिए के दाने या सौंफ का शरबत गुलाब का शरबत गुलकंद इत्यादि ठंडी प्रकृति वाले पदार्थ का सेवन करना चाहिए
2. दूध गाय के ताजा और शुद्ध दूध को गर्भवती के लिए श्रेष्ठ माना जाता है गिलास में आधा घंटा रखे रहने के बाद ही पीना चाहिए ठंडे दूध से परहेज करना चाहिए क्योंकि दूध पीने की वजह से आपको गैस होने की शिकायत हो सकती है|कहां जाता है कि यदि गर्भवती स्त्री दूध का सेवन नहीं कर पाती है लेकिन ऐसा करने से आपको और आपके आने वाले संतान को नुकसान हो सकता है ऐसे में आपकी संतान को भी आगे चलकर दूध पीने की इच्छा नहीं होगी इसलिए दूध का सेवन गर्भावस्था के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है
3. छाछ घर में बनी ताजी और खट्टी ना हो ऐसे दूध से पतली बनाई हुई छाछ का सेवन करना चाहिए दही में पानी डालकर अच्छे से मत ले और उसके ऊपर से निकल निकल ले उसके बाद ही छाछ को पिए बाजार में मिलने वाले नमकीन या पैक फूड का काम सेवन करें छाछ में जरा सेंधा नमक डालकर पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा गर्भावस्था के समय रोज छाछ को पीते रहना चाहिए|
4.मक्खन घी घर में बने मक्खन का उपयोग करते रहना चाहिए ध्यान रहे की ताजा मक्खन का ही प्रयोग करें
5.दाल फलियां और धान में इन सारी चीजों का सेवन करते रहना चाहिए सुबह शाम के भजन में दाल का उपयोग जरूर करना चाहिए चावल गेहूं जैसे पचाने वाले अन्न का सेवन करना चाहिए|
6. सब्जियों में गर्भवती स्त्री को हरी सब्जियों का रोग उपयोग करना चाहिए सब्जियों को सूप बनाकर सलाद बनाकर या पुलाव में डालकर रोज खाना चाहिए हरी भाजी से बना सूप या पराठे समय-समय पर लेते रहना चाहिए|
7. गर्भवती स्त्री को ऋतु के अनुसार मौसम के अनुसार रोज एक फल खाना चाहिए सेब संतरा वाला मौसम में अंजीर आम नारियल अंगूर अनार में से रोज एक या दो फल खाने चाहिए
8. गर्भवती स्त्री को रोजाना शुद्ध और गुणवत्ता वाले शहर का एक से दो चम्मच सेवन करना चाहिए शहर को कभी गम ना करें गर्म दूध में ना डालें सुबह-सुबह पंचामृत या दूध में शहद डालकर इसका सेवन करना लाभकारी हो सकता है|
गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए:
मैदा और मैदे से बने भोज पदार्थ जैसे पाव नूडल्स ब्रेड पास्ता केक फर्मेंटेड रेसिपी खमण ढोकला दोष उत्पन्न इडली ज्यादा तला हुआ या मसालेदार खाना मिर्च पापड़ अचार फास्ट फूड जंक फूड इन सभी चीजों का आने वाले बच्चे पर बहुत ही खराब असर पड़ता है और इन सभी चीजों सेवन नहीं करना
अधिक मात्रा में मीठी चीज़ों का सेवन:
बच्चों को डायबिटीज हो सकती है बच्चे को मोटापे का सामना करना पड़ सकता है बच्चा गंगा पैदा हो सकता है|अधिक मात्रा में खट्टे रस का सेवन करने से संतान को स्क्रीन से रिलेटेड रोग होने हो सकते हैं आंखों में खराबी आ सकती है नाक से खून टपकना जैसे दिक्कतें हो सकती हैं|अधिक मात्रा में कड़वा खाने से: बच्चा कमजोर और पतला हो सकता है|अधिक मात्रा में नमक खाने से: बालक के बाल सफेद होने लग जाते हैं और त्वचा पर झुर्रियां का सिकुड़न आने लग जाती है|ज्यादा मात्रा में तीखा खाने से: बच्चा आसक्त हो सकता है शुक्र धातु की कमी वाला और असमर्थ हो सकता है|
डेली डाइट
सुबह का नाश्ता: 8:00 से 8:30 तक नाश्ता कर लेना चाहिए पंचामृत लेना चाहिए रात में भिगोकर तीन से चार बादाम और अंजीर खाना चाहिए 5 से 7 काली किशमिश खा लेना चाहिए एक गिलास दूध हो सके तो शतावरी का पाउडर डालकर पी सकते हैं नाश्ते में रोटी पराठा पोहा उपमा जैसे गर्म और हल्का नाश्ता करना चाहिए 2 घंटे बाद एक फल खा सकते हैं सुबह के नाश्ते और भोजन के बीच डेढ़ से 2 घंटे का समय बच्चे इस तरह सुबह के नाश्ते की प्लानिंग करनी चाहिए|
दोपहर का भोजन:
दोपहर के 12:00 से 1:00 तक दोपहर का भोजन कर लेना चाहिए गर्म और सात्विक भोजन ही लेना चाहिए खाने में रोटी सब्जी दाल चावल सलाद ताजी और खट्टी ना हो ऐसी छाछ लेना चाहिए उसमें जीरा और सेंधा नमक डालकर ले सकते हैं ज्यादा पेट भर के नहीं खाना चाहिए थोड़ा-थोड़ा करके बीच-बीच में खाते रहना चाहिए|
शाम का नाश्ता:
5:00 से 5:30 तक एक कप दूध के साथ टोस्ट जैसा हल्का नाश्ता ले सकते हैं मुरमुरा खा सकते हैं|शाम का भोजन: 8:30 तक शाम का भोजन खा लेना चाहिए हल्का भोजन करना चाहिए पेट भर के नहीं खाना चाहिए सब्जी या रोटी खिचड़ी दाल चावल ले सकते हैं रात को सोते समय एक गिलास गाय के गर्म दूध में घी डालकर रोज पीना चाहिए| अब हम गर्भावस्था की ओर बढ़ रहे हैं तथा गर्भावस्था के हर महीने में हमें क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए क्या पहनना चाहिए और गर्भ संस्कार कैसे करना चाहिए इसके बारे में जानेंगे:
प्रथम महीना:
पहले महीने में गर्भ का आकार बुलबुल के समान होता है पहले महीने में गर्भ की स्थिति और गर्भ में होने वाले विकास से खुद गर्भवती स्त्री अनजान होती है जब मासिक धर्म का की तारीख निकल जाए और या तो उससे ज्यादा दिन हो जाए और कुछ मेडिकल जांच जैसे यूपी टी टेस्ट करने पर पता चलता है की प्रेगनेंसी है इनमें से कुछ लक्षण हमको दिखने लगते हैं जैसे कि थोड़ा चक्कर आना उल्टी जैसा लगना और बेचैनी सा महसूस होना यह कुछ लक्षण गर्भावस्था के पहले महीने में हल्के फुल्के देखने मिलते हैं|
दूसरा महीना:
ज्यादातर इसी महीने में पता चलता है कि वह स्त्री गर्भवती है या नहीं इसलिए आहार बिहार में ले जाने वाले परिवर्तन इसी महीने से शुरू किए जाते हैं इस महीने में गर्भ के हृदय में धड़कन शुरू हो जाती है इसलिए इस महीने में होने वाले सोनोग्राफी में डॉक्टर लिखते हैं कार्डियक एक्टिविटी सीन जिसका मतलब है शिशु के हृदय में धड़कनें शुरू हो गई हैं|इस महीने में शिशु के हाथ और पर विकसित होने लगते हैं जबकि उंगलियां नहीं आई हुई होती हैं इसलिए वैद्य से पुंसवन संस्कार के लिए श्रेष्ठ समय मानते हैं इस महीने में जननेन्द्रिय अभी विकसित अवस्था में होती है|इस महीने में कुछ महिलाओं को उल्टी जैसा लगना चक्कर आना सीने में जलन खाने के प्रति अरुचि होना साथी गर्भावस्था जाने परिवर्तन के कारण गुस्सा आना बात-बात पर रोना आना कुछ भी करने का मन नहीं होना और कुछ महिलाओं में बहुत ज्यादा नींद आने के भी लक्षण दिखते हैं
आहार:
शुरुआती लक्षण होने की वजह से गर्भवती को अलग-अलग फल या प्रवाही या कुछ आहार हर 2 घंटे पर लेते रहना चाहिए खाली पेट की वजह से उल्टी की समस्या बढ़ जाती है इसलिए कुछ ना कुछ समय-समय पर तथा दो-दो घंटे में खाते रहना चाहिए|जिन महिलाओं को उल्टी और गले में जलन की समस्या ज्यादा होती है उन्हें सूखे धनिया को पानी में तीन से चार घंटे भिगोने के बाद मसल कर उसमें मिश्री दल के उसे पानी को छानकर पीना चाहिए तथा दो-दो घूंट पीते रहना चाहिए इससे जलन और उल्टी जैसी समस्या में आराम मिलता हैक्या खाना चाहिए: इलायची वाला गाय का दूध ले सकते हैं यदि आपका वजन नहीं बढ़ रहा हो तो एक चम्मच घी गर्म दूध में डालकर ले सकते हैं
♥️ पोहे से बनी पतली खीर ले सकते हैं
♥️ कमल ककड़ी ,सौंफ का शरबत, दाल ,रोटी, दूध, चावल ,घी ,नारियल पानी, नींबू
♥️ वेजिटेबल सूप ,परवल ,लौकी, तुरई ,काली किशमिश, खजूर ,सेब मोसंबी ,अंगूर इन सभी चीजों को ले सकते हैं|
क्या नहीं खाना चाहिए:
मैदे से बने खाद्य पदार्थ ,बेकरी प्रोडक्ट्स, फर्मेंटेड आइटम ,बैगन ,मूली, गाजर ,जैसी गर्म सब्जियां चीज और अंडे इन सब चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए|
ध्यान रखने योग्य बात:
अभी गर्व अपनी माता से पूरी तरह जुड़ा नहीं है जिसके कारण गर्भपात या गर्व स्राव हो सकता है इसलिए स्त्री को उठने बैठने चलने में विशेष ध्यान रखना चाहिए भारी समान नहीं उठाना चाहिए फेसलान वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए मन को शांति मिले इस प्रकार के कुछ गीत या संगीत सुनना चाहिए व्यायाम नहीं करना चाहिए यूरिन या स्टॉल को नहीं रोकना चाहिए छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा नहीं करना चाहिए अपने मन को खुश रखना चाहिए|वस्त्र आभूषण: हल्के रंग के जैसे सफेद ,हल्का गुलाबी ,केसरी रंग के कपड़े पहने, चांदी या हीरे के आभूषण धारण करें|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम शीतकारी और शीतली प्राणायाम कर सकते हैं|
पुंसवन संस्कार:
गर्भधारण करने के बाद यह दूसरा संस्कार होता है यह संस्कार दूसरे महीने में किया जाता है लोगों को लगता है कि पुंसवन संस्कार के द्वारा पुत्र या पुत्री की प्राप्ति तय की जाती है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है इस संस्कार के द्वारा श्रेष्ठ गन वाले और मेधावी संतान की प्राप्ति की जाती है घर में 45 दिनों के बाद पिट्यूटरी ग्लैंड का निर्माण होता है यह शरीर की दूसरी ग्रंथि है इसलिए इसे मास्टर ग्लैंड आफ बॉडी कहा जाता है|
तीसरा महीना:
इस महीने में गर्भ मां के साथ और अच्छे तरीके से जुड़ जाता है दोनों हाथ और उसकी उंगलियां तथा दोनों पांव और उसकी उंगलियां बनना शुरू हो जाती हैं कर तैयार हो रहा होता है लेकिन दिमाग अभी भी नरम होता है आंखों पर पलकें आ जाती है जो बंद रहती हैं नाक मुंह कांजी वी गले की रचना शुरू हो जाती है पर हॉट बंद रहते हैं अभी भी|
शारीरिक बदलाव :
इस महीने के अंत में गर्भ अपनी माता के शरीर के साथ अच्छे तरीके से जुड़ गया होता है इसलिए उल्टी चक्कर अपच जैसी समस्याएं काम हो जाती है इस महीने में शिशु अपनी मां से जुड़ाव थोड़ा कमजोर होने की वजह से शारीरिक संबंध बनाना निषेध है लेकिन पति-पत्नी एक दूसरे के साथ अंतरंग समय व्यतीत करते हुए आने वाले शिशु के बारे में सकारात्मक विचारों पर बात कर सकते हैं|
आहार:
एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच गाय का घी डालकर पीना चाहिए, दूध के साथ गुलकंद भी ले सकते हैं|आवाले का रस च्यवनप्राश मुरब्बा ले सकते हैं मूंग दाल से बने व्यंजन खीर कमल ककड़ी का सेवन करना चाहिए कड़ी पत्ता डालकर पराठा या चटनी ले सकते हैं|
🧘🏻 धार्मिक पुस्तकों का पठन करें खास करके अपने इष्ट देवी देवताओं के चरित्र को पढ़ना चाहिए क्योंकि पांच इंद्रियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक्टिविटी करना चाहिए इससे बच्चे का दिमाग का विकास बहुत अच्छा होता है|वस्त्र आभूषण: जैसे पीले रंग के वस्त्र पहने साथ ही सोने या पुखराज के आभूषण धारण करना चाहिए|
प्राणायाम:
अनुलोम –विलोम, शेतकरी,शीतली,भ्रामरी
पुस्तक:
रामायण ,महाभारत ,बुद्ध चरित्र ,महावीर चरित्र ,स्वामीनारायण चरित्र ,इत्यादि|
व्यंजन:
मूंग दाल हलवा, राजमा चावल, अंकुरित मूंग,मूंग के चीले, हरा भरा सूप|हमेशा खुश रहना चाहिए|गर्भसंवाद: सबसे पहले शांत जगह पर बैठो अपनी आंखों को बंद करो खुश होते हुए गहरी सांस भरो तीन बार ओम का उच्चारण करो और अपने शिशु के साथ बात करो मेरे प्यारे शिशु पाल-पाल विकसित हो रहा तुम्हारा यह शरीर मुझे खुश कर रहा है तुम्हारे दिल की धड़कनें शुरू हो चुकी है जिसे मैं महसूस कर सकती हूं परमात्मा तुम्हें मेरे गर्भ में स्थिर रखें तुम्हारी रक्षा करें तुम्हारा सुंदरतम विकास करें|
चौथा महीना:
चौथे महीने में गर्भ में पल रहे शिशु में हृदय और भी स्पष्ट रूप धारण कर लेता है हृदय शरीर का एक ऐसा अंग है जो संपूर्ण शरीर से कुछ रक्त लेता है और संपूर्ण शरीर को कुछ रख देता है हृदय की धड़कनें डेढ़ महीने में आ जाती है लेकिन इस व्याख्या के अनुरूप हृदय के भीतर के प्रणाली ज्यादातर चौथे महीने में शुरू होती है|
आहार:
रोज 10 से 12 ग्राम मक्खन और मिश्री खाना चाहिए दही चावल खाना चाहिए अमला अनार संतरा मौसंबी अंगूर सेब इन फलों का सेवन करना चाहिए चने की दाल चने से बने व्यंजन को खाना चाहिए ध्यान रखने योग्य बात: इस महीने से रोजाना पेट के ऊपर तिल तेल से मालिश करना चाहिए अपने मां के शौर्य गीत गाकर या सुनना चाहिए दुखी नहीं होना चाहिए शांति का संदेश देने वाली कहानी और कथाओं को पढ़ना चाहिए|वस्त्र और आभूषण: केसरिया पीले वर्ण के लाल रंग के वस्त्र पहनना चाहिए सोने के आभूषण को धारण करना चाहिए|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम वज्रासन ताड़ासन ओमकार का उच्चारण पांव और गर्दन के सामान्य एक्सरसाइज|जिस चीज को देखकर सोच कर मन खुश होता है उन चीजों को देखना चाहिए और सुना चाहिए जैसे आप पेड़ पौध हो को देखकर खुश हो रहे हैं तो आपको उद्यान जाना चाहिए अच्छे फूलों को देखना चाहिए जिससे मन खुश होता है झरने देखना चाहिए इससे आपका बच्चा भी खुश रहेगा और सकारात्मक प्रभाव बच्चे पर पड़ेगा|
गर्भ संवाद:
प्रिया शिशु तुम्हें कई महान कार्य करने हैं मेरे गर्भ में तुम जितना सिख पाव सब सीख लेना परमात्मा तुम्हें खूब शक्ति प्रदान करें डॉक्टर ने कहा है कि तुम अब मेरी आवाज सुन सकते हो इसलिए मैं अब रोज तुमसे खूब सारी बातें करूंगी|
पांचवा महीना:
इस महीने में नॉनवेज एंड प्याज लहसुन जैसे चीजों से दूर रहना चाहिए|
आहार:
रोज एक गिलास गाय के दूध में एक चम्मच गाय का घी डालकर पीना चाहिए दूध और चावल की खीर खाना चाहिए दूध पनीर घी चीज दही लस्सी चार्ज विशेष प्रमाण में लेना चाहिए नॉन वेज एंड खराब प्याज लहसुन जैसी चीजों को नहीं खाना चाहिए जितना हो सके ज्यादा से ज्यादा सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए चावल से बने व्यंजन खाना चाहिए|हम जानते हैं कि इस महीने में शिशु काम के मां का विकास हो जाता है इसलिए डरावनी और अच्छी न लगने वाले दृश्यों वाली फिल्में पुस्तकों से दूर रहना चाहिए शूरवीर साहसिक महान पुरुषों के चरित्र की किताबें या फिल्म टीवी सीरियल देखना चाहिए जितना हो सके माता को खूब खुश रहना चाहिए और अपने पेट पर हाथ रखकर आने वाले शिशु के साथ खूब सारी अच्छी बातें करना चाहिए|वस्त्र आभूषण: इस महीने में सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहने और मोतिया चांदी के आभूषण पहन सकते हैं|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम वज्रासन ताड़ासन ओम का उच्चारण गायत्री मंत्र|गर्भ संवाद मेरे प्यारे शिशु तुम्हारा मन वह सब ग्रहण कर रहा है या सुन रहा है जो मैं ग्रहण करती हूं इसलिए मैं हमेशा खुश और आनंद से भरी हुई रहती हूं प्रभु तुम्हारे मन को शांति स्थिरता और संकल्प बोल दें ऐसे मेरी प्रार्थना है परमात्मा ने तुम्हें बहुत ही सुंदर मां दिया है जो तुम्हारे जीवन जीने की शैली का आधार बनेगा|
छठा महीना:
इस महीने में शिशु के हाथ पैर आकार में वृद्धि होने लग जाती है जिससे मन का पेट बड़ा होने लग जाता है पेट बड़ा होने से उसे पर स्ट्रेच मार्क्स होने लग जाते हैं जिससे पेट में खुजली होती है और पेट के त्वचा का रंग सांवला पढ़ने लग जाता है|
आहार:
रोज गाय के दूध में एक से दो चम्मच गाय का घी डालकर पीना चाहिए दूध की मलाई खाना चाहिए मिश्री वाला दही खाना चाहिए रात में रोज तीन से चार बादाम और अखरोट भिगोकर सुबह अच्छे से चबाकर खाना चाहिए टिंडे नहीं खाना चाहिए बादाम अखरोट खाएं चावल और घी खाएं|
कुछ ओर बातें:
दिमाग को बढ़ाने वाले खेल खेलना चाहिए जैसे के सुडोकू क्रॉसवर्ड आदि वैज्ञानिक संशोधन के बारे में पढ़ना चाहिए डिस्कवरी चैनल देखना चाहिए पांचवी से लेकर दसवीं तक की गणित की पुस्तक लेकर उसको सॉल्व करना चाहिए|
वस्त्र और आभूषण:
भूरे या ग्रे रंग के वस्त्र और नीलम के आभूषण धारण करना चाहिए|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम और भ्रामरी ओम का उच्चारण गायत्री मंत्र का जाप गोपाल संतान मंत्र को रोज सुनना चाहिए|कुछ किताबें और फिल्में जैसे की गणित और विज्ञान के किताब सफारी मैगजीन डिस्कवरी चैनल वैज्ञानिक शोध के ऊपर आधारित किताबें पढ़ना चाहिए या फिर आप इन्हें मोबाइल में वीडियो लगाकर भी सुन सकते हैं इससे बच्चों के दिमाग पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा|
व्यंजन:
लौकी से बने व्यंजन जैसे की हवा लौकी के कोफ्ते बादाम का हलवा वेजिटेबल सूप बादाम के लड्डू इन सब का सेवन छठे महीने में करना चाहिए|
गर्भ संवाद:
प्यार शिशु कमल की फूलों की तरह तुम विकसित हो रहे हो गुलाबी रंग की तुम्हारी नाजुक त्वचा को मैं बंद आंखों से भी देख पा रही हूं फूलों की तरह कमल तुम्हारे अंगों को छूने के ख्याल से ही मेरे मन में प्रेम से भरे मातृत्व उछलने लग जाती है अब धीरे-धीरे तुम्हारे मन और बुद्धि का विकास हो रहा है यही मन और बुद्धि तुम्हें अपने उद्देश्य तक पहुंचने में सहायता करेगी मैं चाहती हूं कि तुम्हारी बुद्धि दिव्या हो तुम्हारी सोच पवित्र हो सत्य सत्य का भेद जान पाए सही गलत का भेद जान पाए ऐसे विवेकशील हो परमात्मा तुम्हें बुद्धि नहीं बल्कि तो बुद्धि दे मुझे यकीन है कि मेरी कोशिशें को तुम्हारा प्रतिभाव मिलेगा ही सुंदर विकास करना बुद्धिमान बना प्रज्ञवन बना खुश रहना|
सातवां महीना:
इस महीने में शिशु पूर्ण रूप से तैयार हो जाता है मां का पेट एकदम बढ़ने लगता है जिससे पैर में सूजन पर भारी हो जाना जैसी समस्याएं आने लग जाती हैं शिशु का वजन और शिशु के बाल बढ़ाने की वजह से सीने में जलन गले में जलन एसिडिटी गैस जैसी समस्याएं होने लग जाती हैं तो हो सके तो इस महीने में खाने में नमक का उपयोग कम कर दें |सलाद छाछ में ऊपर से नमक ना डालें हो सके तो सेंधा नमक का ही उपयोग करें|
आहार:
गाय के दूध में घी डालकर पिए, दूध की मलाई या खीर खाएं ,रोजाना एक अंजीर खाएं भिगोया हुआ ,मूंग के व्यंजन खाएं ,तीन से चार बादाम रात में भिगोकर सुबह खाएं, एक से दो अखरोट खाना चाहिए ,चावल के साथ घी खाना चाहिए केसर वाला दूध पीना चाहिए ,एक नारियल खाएं, मिश्री और घी लेना चाहिए|जिस काम को करने में आपको बहुत अच्छा लगे उसे काम को करना चाहिए जैसे कि अगर आपके घर सजाना अच्छा लगता है गार्डनिंग अच्छी लगती है पक्षियों को दाना पानी देना अच्छा लगता है तो आप यह सब कर सकते हैं संगीत सुनना ,बांसुरी बजाना, हारमोनियम,, ढोल बजाना आदि धर्म विज्ञान के बारे में पढ़ना, हो सके तो किसी ज्ञानी के साथ इसके बारे में चर्चा और या वार्तालाप करना|
वस्त्र और आभूषण:
लाल रंग हल्के गुलाबी रंग के वस्त्र पहने पन्ना और सोने के आभूषण धारण करना चाहिए|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम, भ्रामरी ,ओम का उच्चारण आदि|
सीमंतोन्नयन संस्कार:
इस संस्कार का पहला उद्देश्य है गर्भ में पल रहे शिशु को मानसिक शांति प्रदान करना उसका सरकार करना अच्छे संस्कारों को उसमें डालना गर्भस्थ शिशु को बुद्धिशाली बनाना|
गर्भ संवाद:
प्रिया शिशु आज मैं तुमसे बात करने वाली हूं जब भी मैं कोई सुंदर दृश्य देखती हूं या कुछ बहुत अच्छा खाना चखती हूं तब मुझे तुम्हारा ख्याल आता है क्योंकि मेरी इंद्रियों तुमसे जुड़ी हुई है तुम मेरे अस्तित्व का अभिन्न अंग हो|
आठवां महीना:
आठवां और नौवां महीना गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है इस महीने से शिशु का वजन बढ़ाना शुरू हो जाता है साथ ही माता के शरीर में दूध बना भी शुरू हो जाता है इस महीने से माता का विशेष ख्याल रखना होता है|
आहार:
दूध चावल की खीर खानी चाहिए, रवा या सूजी का उपमा ,इडली , हलवा ,वेजिटेबल सूप, खिचड़ी, दूध मिश्री में बना मेथी पाक ,सारी सब्जियों को खाना चाहिए ,दूध और सूजी की खीर खा सकते हैं, ऋतु के अनुसार फल ले सकते हैं ,अखरोट ,खजूर ,अंजीर खाना चाहिए|अपने पेट पर अपना हाथ घुमाते हुए रोग शिशु के साथ 10 से 15 मिनट तक बातें करना चाहिए, हो सके तब तक इस महीने सफल न करें ,रोजाना किसी खास समय पर किया हुआ खास भजन गीत या संगीत अपने शिशु को सुनाएं, जो भी पढ़े जोर से पढ़े ताकि आपका शिशु भी उसे सुन सके|
आभूषण और वस्त्र:
किसी भी रंग के वस्त्र और सोने के आभूषण धारण करना चाहिए|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम ,भ्रामरी प्राणायाम ,ओम का उच्चारण, गायत्री मंत्र|खाने में सूजी के चीले ,सूजी का हलवा,वेजिटेबल सूप पुलाव,सूजी की वेजिटेबल इडली|
गर्भसंवाद
प्रिया शिशु तुम्हारा शरीर श्रेष्ट रूप से विकसित हो रहा है तुम्हारा वजन भी अच्छी तरीके से बढ़ रहा है तुम्हारा स्थान धीरे-धीरे बदल रहा है सर नीचे की ओर आ रहा है जो अब मैं महसूस कर रही हूं मेरे गर्भ में तुम्हारे स्थित उपस्थित के दिव्य आनंद की अनुभूति में कर रही हूं मेरे प्यारे शिशु मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं ईश्वर तुम्हारी संपूर्ण रूप से रक्षा करें|तुम दयावान हो करुणा मैं हूं तुम्हारी मुस्कान बहुत ही प्यारी है तुम बहुत तेजस्वी हो इस तरीके से रोजाना अपने शिशु से 10 से 15 मिनट बातें करें|
नौवां महीना:
इस आखिरी महीने में शिशु संपूर्ण रूप से तैयार हो जाता है मां का पेट आकार में बहुत बड़ा दिखाई देने लगता है इसी वजह से मन को भारी पर महसूस होता है जल्दी थक जाते हैं थोड़ा सा काम करने पर यह चलने पर सांस फूलने लग जाती है जैसी समस्याएं होने लग जाती हैं|
आहार:
पतली खिचड़ी रात को घी डालकर खाएं, पुराने चावल दाल बाजार डालकर खिचड़ी बनाएं और घी डालकर खाएं, वेजिटेबल सूप,रोजाना एक अखरोट, रात को एक गिलास गर्म दूध में घी डालकर पीना चाहिए, मूंग की दाल या मूंग की सब्जी और चावल खाना चाहिए, मूंग का पानी पीना चाहिए|प्रकृति का आनंद उठाएं मां को प्रसन्न रखें डिलीवरी के दिन की तैयारी करने के लिए एक बैग में सूती कपड़े बेचने के लिए चादर नैपकिन जैसी चीज भर कर तैयार रखें जो की बाद में काम आएंगे {hospital bag}
वस्त्र आभूषण:
खुले खुले सफेद रंग के वस्त्र पहने और मोती या चांदी के आभूषण धारण करें|
प्राणायाम:
अनुलोम विलोम,ओम का उच्चारण,भ्रामरी प्राणायाम|खाने में मिक्स खिचड़ी खाना चाहिए|
गर्भ संवाद:
प्रिय शिशु अब तुम संपूर्ण रूप से विकसित हो चुके हो मैं बेहद खुश हूं कि तुम्हें देख पाने के दिन अब नजदीक आ रहे हैं हम सब तुमसे मिलने के लिए बहुत ही उत्सुक है अब धीरे-धीरे मेरे गर्भ में तुम्हें अपना सिर नीचे की ओर ले जाना है मुझे पूरा यकीन है कि तुम्हारा आगमन बहुत ही सरलता से होने वाला है मेरे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे तुम्हारे आने से ,यह दुनिया बहुत ही सुंदर है बहुत सारी खूबियां से भरी हुई है जब तुम इस दुनिया में आओगे तो हम सब ढेर सारे प्यार और उत्साह के साथ तुम्हारा स्वागत करने के लिए तैयार होंगे मेरे प्यारे बच्चे इन 9 महीना में मैंने भी तुम्हारे साथ हर पल तपस्या की है हम सबको इस तपस्या का सुंदर फल मिले ऐसी ईश्वर से प्रार्थना है|

यह एक उत्सव का समय है,ईश्वर स्वयं एक शिशु के रूप में हमारे घर पधारने वाले हैं|आइए,उनके लिए स्वागत की तैयारी करते हैं|