मानसिक स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद: तनाव, चिंता और डिप्रेशन का प्राकृतिक समाधान – डॉ. श्वेता सोनी

मानसिक स्वास्थ्य क्या है:

मानसिक स्वास्थ्य हमारे मन विचार भावनाओं और व्यवहार की स्थिरता को दर्शाता है यह हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है जैसे कि हम कैसा महसूस करते हैं कैसा सोचते हैं किन परिस्थितियों को किस तरह से निपट आते हैं अगर यह सारी परिस्थितियों और यह व्यवहार अच्छी तरीके से हो रहे हैं तो हमारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा है|

मानसिक स्वास्थ्य का महत्व:

मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है या जरूरी है तनाव, चिंता ,अवसाद, अनिद्रा,और अन्य मानसिक विकारों का समय पर उपचार करना बहुत जरूरी है| आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य को संतुलित किया जा सकता है| ध्यान करके या मेडिटेशन करके मानसिक स्वास्थ्य को भी काम किया जा सकता है|

मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण:

आत्म संतोष और प्रसन्नता का अनुभव तनाव को संभालने की क्षमता यह मानसिक स्वास्थ्य के कुछ लक्षण है स्पष्ट सोने और निर्णय लेने की योग्यता संबंधों में सामंजस्य और सामूहिक सहयोग जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण हैं|

मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण:

अत्यधिक तनाव और चिंता रहना मानसिक स्वास्थ्य को बिगड़ने का मुख्य कारण है|

1.असंतुलित दिनचर्या या जिसे क्या कहा जाता है खराब दिनचर्या और अस्वस्थ कर जीवन शैली भी मानसिक स्वास्थ्य को बिगड़ती हैं|

2.नींद की कमी होना|

3.पारिवारिक और सामाजिक संघर्ष|

4.परिवार में चल रहे किसी तनाव की वजह से भी मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है|

5.नशा और अन्य हानिकारक आदतों का सेवन करना जैसे धूम्रपान करना शराब पीना और अन्य तरीके का नशा करना जिससे तनाव होता है इन सभी कर्ण की वजह से भी मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता स्वाभाविक है|

6.असंतुलित आहार और पोषण की कमी से भी मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ता है जैसे बाहर का अपवित्र खाना खाना मांस मछली इन सभी चीजों का अत्यधिक सेवन करना पोषण युक्त खाना ना खाना|

7.भावनात्मक और मानसिक आघात के कारण जैसे मन में किसी बात को रखकर इस को बार-बार सोचते रहना या बहुत ज्यादा सोच कर परेशान होना यह सभी मानसिक स्वास्थ्य को बिगड़ने के मुख्य कारण हो सकते हैं|

8. मानसिक स्वास्थ्य के और भी कारण हो सकते हैं जैसे की गरीबी होना बेरोजगारी होना अगर आपका कैरियर अभी तक नहीं बन पाया है और आपकी उम्र ज्यादा हो गई है यह भी एक मानसिक बीमारी का कारण बन सकती है सामाजिक भेदभाव जैसी चीज मन में तथा स्वास्थ्य पर बहुत ही नेगेटिव प्रभाव डालती है किसी भी तरीके का दुर्व्यवहार मानसिक स्वास्थ्य समस्या का कारण बन जाता है|

मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता होना बहुत जरूरी है कभी-कभी इंसान मानसिक बीमारी से लड़ते हुए अवसाद में चला जाता है और वह गलत कदम उठाने की सोचने लग जाता है|

मानसिक विकार के लक्षण:

1.ज्यादा चिंता करना डर लगा घबराहट होना|

2.नींद ना आना या बहुत ज्यादा नींद का आना यह भी मानसिक विकार का एक लक्षण माना जाता है|

3.चिड़चिड़ापन और गुस्सा बहुत ज्यादा आना छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाना या मन परेशान रहना यह भी मानसिक विकार के लक्षण हैं|

4.एकाग्रता की कमी होना जैसे कि हम किसी एक जगह पर बैठे हुए हैं पर हमारा ध्यान कहीं और पर है एक जगह पर मन स्थिर नहीं है हम सोच कुछ और रहे होते हैं और कर कुछ और रहे होते हैं यह मानसिक विकार के लक्षण है|

5.किसी भी कार्य में रुचि का अभाव जैसे किसी भी कार्य को कर रहे होते हैं पर हमारा मन नहीं लगता उसे कार्य को करने में बेमन से उसे कार्य को करते हैं जिससे मन बहुत परेशान होता है|

6.आत्महत्या के विचार या आत्म नुकसान के प्रवृत्ति, जब हमारा मन बहुत परेशान होता है तब हमें कुछ भी शुद्ध बुद्ध नहीं होती है और हमारे मन में बहुत ही गलत गलत विचार आने लग जाते हैं जैसे की आत्महत्या कर लेना या खुद को नुकसान पहुंचाना आदि आदि|

7.सामाजिक मेलजोल से दूरी बनाना|

मानसिक स्वास्थ्य संबंधित मिथ्या या भ्रामक धारणाएं:

मानसिक रोग केवल दुर्बल मानसिकता के लोगों को होती है जिनके मन बहुत कमजोर होता है उन्हें मानसिक रोग होने के ज्यादा संभावनाएं होती हैं मानसिक रोगों का कारण भूत प्रेत या पाप है ,ऐसा लोग कहते हैं जबकि ऐसा कुछ नहीं होता है|

1.मानसिक रोग केवल दावों से ही ठीक हो सकते हैं|

2.मानसिक विकार कभी ठीक ही नहीं हो सकते हैं|

3.मानसिक रोगी समाज में कार्य करने के लायक नहीं होते हैं|

4.लेकिन ऐसा नहीं है बहुत सारे लोगों के बहुत सारे धारणाएं होती हैं कि मानसिक रोग भूत प्रेत की वजह से या फिर सामाजिक लोगों की वजह से या दवाइयां की वजह से होती हैं पर यह सारी बातें गलत है|

मानसिक रोग के लिए उचित आहार बिहार एवं अचार: 

आहार –

1.पौष्टिक संतुलित और सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए|

2.मौसमी फल हरी सब्जियां सूखे मेवे घी और दूध को खाने में शामिल करें|

3.चाय ,कॉफी तली, भुनी चीजों और अधिक मिर्च मसाले वाले भोजन से परहेज करें|4.तुलसी ,अश्वगंधा ,ब्राह्मी ,शंखपुष्पी आदि का प्रयोग लाभकारी हो सकता है इन सभी चीजों का प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही उपयोग करें|

विहार(जीवनशैली):

प्रातः काल सूर्योदय के समय पहले और ताजी हवा में गहरी सांस ले|

प्रतिदिन ध्यान और प्राणायाम करें शांत जगह पर बैठ जाएं मन को शांत कर ले और आंखों को बंद करके ध्यान लगाए या मेडिटेशन करें|

पर्याप्त रात की नींद ले और डिजिटल उपकरणों जैसे मोबाइल लैपटॉप टीवी इन सभी उपकरणों का काम से कम उपयोग करें|

योगासन जैसे श्वसन सुखासन अनुलोम विलोम आदि को अपनाएं|

आचार (व्यवहार और सोच):

पॉजिटिव सोचें

आत्म निरीक्षण करें और अपने आप से कभी-कभी बातें करें मन में|

परिवार और मित्रों के साथ समय बिताए उनसे बातें करें|

अपनी भावनाओं को व्यक्त करें जो भी आपके मन में चल रहा हो या आप सोच रहे हो उनको अपनों के साथ बांटे और मदद लेने से ना हिचकिचाए|

कभी भी अगर मन परेशान हो तो अकेले में बैठकर थोड़ा सा ध्यान लगाने की कोशिश करना चाहिए और पॉजिटिव सोचना चाहिए खुश रहने की कोशिश करना चाहिए लोगों से मिलते रहना चाहिए परिवार के साथ अपनी बातें आवश्यक बाटे|

हमारी सेवाएं:

मानसिक विकारों का आयुर्वेदिक निदान एवं उपचार करें|

पंचकर्म चिकित्सा जैसे कि अभ्यंग तेल से मालिश नस्य विवेचन एवं शिरोधारा कराए|

योग एवं ध्यान करें|

आहार एवं दिनचर्या को चिकित्सक से परामर्श के दौरान पूछ कर ले|

counselling  करायें |

मानसिक स्वास्थ्य सुधार के लिए आयुर्वेदिक उपाय:

1.सात्विक आहार में जैसे ताजा फल ,हरी सब्जियां, दूध ,घी और आसानी से बच जाने वाला भोजन लें|

2.योग एवं प्राणायाम प्रतिदिन 30 मिनट तक करें|

3.मानसिक शांति के लिए प्रतिदिन 10 से 15 मिनट तक ध्यान करें या मेडिटेशन करें|

4.अच्छे दिनचर्या के लिए नियमित रूप से सोने और जागने का समय तय करें|

5.आयुर्वेदिक औषधियां अगर आप ले रहे हैं तो अपने आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करके ही औषधीय का सेवन करें|

🧘🏻आपका मानसिक स्वास्थ्य हमारे लिए महत्वपूर्ण है🧘🏻

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