स्थूलता (obesity )क्या है? आयुर्वेदिक कारण, लक्षण और मोटापा कम करने के 14 असरदार उपाय

स्थूलता या मोटापा क्या है?

स्थूलता मेद धातु की अत्यधिक मात्रा है |शरीर में वसा मांसपेशियां, हड्डियों , वसा एवं जल का शरीर में ज्यादा से ज्यादा एकत्रित होना ही मोटापा है आयुर्वेद में मोटे व्यक्ति को बहुत ही निंदनीय माना गया है आयुर्वेद के अनुसार मोटे लोगों में बहुत सारे रोग होते हैं मोटे व्यक्ति में बंधत्व या इनफर्टिलिटी जिसे कहते हैं वह होने की संभावना दोगुना बढ़ जाती है जबकि कमर दर्द घुटने के दर्द की संभावना 17 गुना अधिक हो जाती है

मेद हमारे शरीर के लिए आवश्यक क्यों है?

आयुर्वेद में मेद का काम इस प्रकार वर्णित है जैसे सामान्य परिस्थितियों में शारीरिक वसा शरीर की नमी को बनाए रखती है, पसीने का निर्माण करती है ,ऊर्जा संग्रहण के द्वारा शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है ,और आघातों से रक्षा करके अस्थियों को या हड्डियों को पोषण देता है निश्चित मात्रा में शारीरिक वसा के निम्नलिखित कार्य हैं–हृदय को ऊर्जा प्रदान करता है|आघातों के प्रति सहनशीलता प्रदान करता है ऊर्जा का संग्रहण करता है ,वसा हमारे शरीर में कई सारे अच्छे कार्य भी करता है जो हमारे शरीर के लिए जरूरी है पर वह जब अधिक मात्रा संचित होने लग जाती है तब शरीर में तकलीफ और मोटापा शुरू हो जाता है|

वसा कहां कहां  होता है?

वसा जीवित प्राणियों के पेट में या उसके चारों ओर इकट्ठा होती है यह हड्डियों में भी उपस्थित होती है इसका अर्थ यह है कि जब कोई व्यक्ति मोटा होता है तो उसका पेट बाहर निकल आता है|

एक मोटे व्यक्ति के शरीर के लक्षण निम्न प्रकार से बताए गए हैं:

जैसे स्थूल रोगी या मोटे रोगी के मेद व मांस अधिक बढ़ जाने के कारण चलते समय नितंब पेट व स्तन हिलते रहते हो तो वह स्थूल रोगी कहलाता है |मोटे रोगी में बहुत अधिक सक्रियता नहीं हो पाती है महिलाओं के शरीर में पुरुषों की अपेक्षा अधिक वसा होती है महिलाओं में सामान्यतः वसा उनके नितंबों पर संग्रहित होती है और उन्हें गोलाकार आकृति देती है पुरुषों में वसा उदर प्रदेश में अर्थात पेट वाले हिस्से में संग्रहित होकर सेब की आकृति बनती है मोटापा से संबंधित समस्याएं तब  प्रारंभ होते हैं जब वसा  छाती वाले हिस्से में संग्रहीत होने लग जाती है|

मोटापे के कारण:

आयुर्वेद में मोटापे के कारण स्पष्ट कह गए हैं कि किस कारण वस को शरीर में इकट्ठा करते हैं एवी व्यायाम अर्थात शारीरिक क्रिया ना करना व्यायाम न करना|दिन में सोने से वास इकट्ठा होने लग जाती है शरीर में ऐसा भोजन या आहार बिहार का सेवन करना जिससे शरीर में कफ दोष जो शरीर में भारीपन को बढ़ाता है ऐसे आहार बिहार का सेवन करने से मोटापा होता है|मीठा खाद्य सामग्री खाने से भी मोटापा बढ़ता है मनुष्य अपनी खपत क्षमता से ज्यादा कैलोरी का आहार लेता है तो यह अतिरिक्त कैलोरी उसके शरीर में वसा के रूप में इकट्ठी होने लग जाती है|

आनुवांशिक कारण:

एक परिवार में लगभग सभी को मोटापा होता है यदि माता-पिता मोटे हैं या स्थल हैं तो आने वाले संताने भी स्थल होगी इसके अतिरिक्त जीवन पद्धति आदतें तथा खान-पान भी परिवार में स्थूलता या मोटापा बढ़ाने में सहायक होते हैं|

वातावरण:

एक व्यक्ति की खान की आदत तथा उसकी शारीरिक गतिविधियां भी वसा के अधिक संग्रहण में प्रमुख कारण है जब ज्यादा कैलोरी का सेवन किया जाता है या लिया जाता है ज्यादा कैलोरी तो शारीरिक क्रियाएं ना के बराबर होती हैं और जीवन पद्धति जन्य आदतें ज्यादा कैलोरी को वसा के रूप में इकट्ठा करने में सहायता करती हैं,

मानसिक कभी-कभी व्यक्ति नेगेटिव मानसिकता भावों तथा बोरियत ,उदासी, निराशा ,तथा क्रोध आदि के कारण या गुस्सा करने के कारण अधिक खाने लगता है, या उसे बहुत ज्यादा टेंशन होती है यह भी मोटापा को बढ़ाने में सहायता करते हैं|

ज्यादा खाने पीने से जो रोग होते हैं वह है हाइपोथाइरॉएडिज्म , कुशिंग सिंड्रोम, अवसाद, एवं कुछ अन्य मानसिक व्याधियों में व्यक्ति अधिक भोजन करने लगता है जिसके कारण वसा का संग्रहण होने लग जाता है स्टेरॉयड और अवसाद शमन जैसी कुछ दवाइयां भी वजन को बढ़ाती हैं

मोटापा निम्न समस्याओं को उत्पन्न करती है जैसे:

डायबिटीज टाइप 2 ,उच्च रक्तचाप (blood pressure ),कुछ कैंसर, वात रक्त या (Gaut) ,महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म (pcod),पथरी नपुंसकता ,Liver desease हृदय रोग या हृदय घात,संधि वात (Rheumatism)

मोटापा से बचने/ काम करने के उपाय:

1. वजन कम करने में व्यायाम जैसे चुस्ती पूर्वक टहलने जॉगिंग करना आउटडोर गेम्स खेलना|

2.शारीरिक कार्य जैसे काम करना सब्जी लाना ,घरेलू खरीदारी करने के लिए चल के जाना, बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेकर आना, लंबी दूरी तय करना, सीडीओ पर चढ़ना उतरना, ज्यादा से ज्यादा शारीरिक कार्य कैलोरी को घटाने में बहुत मदद करता है|

3.मानसिक कार्य जैसे चिंता तथा किसी समस्या के समाधान में खुद को शामिल कर लेना भोजन खर्च को रोकता है इसलिए कैलोरी का आदान काम हो जाता है और वजन कम करने में सहायता करता है|

4.शहद का उपयोग यह मधुमेह रहित व्यक्तियों के लिए उपयोगी है जिन व्यक्तियों को डायबिटीज की दिक्कत है या समस्या है उन्हें शहद नहीं लेना चाहिए बाकी हर कोई जिन्हें मोटापा की बीमारी है वह शहद ले सकते हैं यह भी कैलोरी को कम करने में फैट को जलाने में मदद करता है|

5.एक गिलास हर्बल चाय जो वजन घटाने में वाली औषधि युक्त हो उसमें दो चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करने से वजन कम होने लगता है इन हर्बल औषधि के साथ मधु का उपयोग कफ व वसा को पिघलता है या काटता है इससे भी मोटापा कम करने में बहुत मदद मिलती है|

6.सोने के समय में कमी करें, दिन में सोने से दूर रहे ,इससे शरीर की कैलोरी उपयोग में नहीं आती है  रात में जल्दी सोए सुबह जल्दी उठकर कम से कम 45 मिनट की वॉक जरूर करें|

7.कफ वह मेद को बढ़ाने वाले भोजन से बचें ,मीठे  पदार्थ, पैक्ड फूड, तेल वाला खाना अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट मीठे द्रव्य कफ व मेद को बढ़ाने वाले होते हैं इसलिए मोटापा जल्दी बढ़ता है|

8.चावल वह इससे बने पदार्थ के स्थान पर गेहूं से बने भोज्य पदार्थ का प्रयोग करने से मोटापा किसी हद तक काम हो सकता है चना व मूंग की दाल उपयोग करने से कफ घटना लग जाता है मूंग का उपयोग रात में भिगोकर सुबह अंकुरित होने के बाद थोड़ा सा उसको बाप में पका कर या उबालकर खाया जा सकता है|

9.अपने चिकित्सक से मिलकर यह पता लगे कि उन्हें कितना वजन कम करना है और समय पर अपना आहार बिहार सुधार लेना ही अच्छा है वरना अगर मोटापा ज्यादा बढ़ जाता है तो कई सारी बीमारियों का घर बन जाता है|

10.छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर वजन को कम करें हर बार लक्ष्य प्राप्ति के बाद अपने आप को धन्यवाद दें वजन में थोड़ी सी कमी भी शरीर में फायदा पहुंचती है अपने भोजन की आदतों में परिवर्तन करें शाम को 7:00 से 8:00 के बीच भजन कर लेना चाहिए सोने के 2 घंटे पहले रात का भोजन कर लेना चाहिए|

11.ज्यादा शरीर ऊर्जा उपभोग करने पर शरीर का वजन कम होता है कम खाना तथा ज्यादा शारीरिक सक्रियता व मानसिक सक्रियता शरीर का वजन कम करती है धीरे-धीरे शारीरिक वजन कम करना ज्यादा प्रभावशाली तथा सुरक्षित है|

12.धीरे-धीरे वजन घटना घटना लंबे समय तक वसा को कम करने में सहायक होता है स्वास्थ्य विशेषज्ञ अधिकतम लाभ के लिए प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट अथवा अधिक व्यायाम की सलाह देते हैं एक माध्यम सक्रिय व्यक्ति को अपना वजन बनाए रखने के लिए 33 कैलोरी प्रति किलोग्राम शरीर भर लेना चाहिए|

13.300 कैलोरी प्रतिदिन का उपभोग काम करना तथा 200 कैलोरी प्रतिदिन शारीरिक सक्रियता बढ़ने से 400 ग्राम प्रति सप्ताह वजन कम होता है पांचो भोजन समूह को प्रत्येक का चयन करें दूध मांस फल और आहार लें संतुलित आहार प्लान में इच्छा के अनुसार भोजन करें|

14.भोजन विधि को पुन निर्धारित करें भोजन में मीठे व वसा की मात्रा कम कर दें वसा की भोजन में कमी करके सफलतापूर्वक वजन कम किया जा सकता है|

शारीरिक क्रियाविधि:

अपनी जीवन शैली के अनुसार शारीरिक क्रिया का निर्धारण करें जॉगिंग करें तैराकी करें और तेज चले या विधायक स्थाई रूप से वजन कम करने में एवं स्वास्थ्य सुधार में सहायक होती है इन सभी दिनचर्या आहार विहार खान-पान और योग और एक्सरसाइज के द्वारा आप इस मोटापे जैसी बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं|

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