उदर रोग क्या है? लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक इलाज एक नज़र में

उदार रोग क्या है? (Digestive Disorder)

उदर रोग पेट आंतो जिगर और पेट के अन्य अंगों से संबंधित कई प्रकार के विकारों का समूह है इन विकारों में पाचन में कठिनाई गैस दर्द और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हो सकते हैं यह रोग गलत आहार तनाव संक्रमण या अन्य चिकित्सा स्थितियों के कारण हो सकता है उदर रोग दिनचर्या बिगड़ना और खान-पान का सही से और सही समय पर ध्यान न रखने पर भी उदर रोग हो सकता है जिसे हम पेट दर्द भी कहते हैं इसके कई कारण हो सकते हैं, इसके बारे में इस आर्टिकल में हम जानेंगे

उदर रोग के लक्षण:

✅ पेट में दर्द: पेट में लगातार या अंतराल पर दर्द महसूस होना ।

✅ गैस बनना:पेट में भारीपन या सूजन महसूस होना ।

✅ अजीर्ण: भोजन पचाने में कठिनाई और असहज्ता होना ।

✅ उल्टी और जी मिचलाना: उल्टी या मचलना महसूस होना जैसे की उल्टी होने वाली है ।

✅ कब्ज या दस्त: असामान्य आंत का आंदोलन होना ।

✅ भूख कम लगना:भोजन खाने की इच्छा में कमी खाने की इच्छा नहीं होना ।

✅ एसिड रिफ्लक्स या जलन: छाती में जलन महसूस होना या गले में जलन महसूस होना ।

उदर रोग के कारण:

✅ खराब आहार: तला भुना या मसालेदार भोजन ।

✅ ज्यादा लाल मिर्च और स्पाइसी और मसालेदार का ज्यादा सेवन करना ।

✅ तनाव: अत्यधिक तनाव से पाचन में समस्या हो सकती है इसलिए तनाव ज्यादा करने पर भी डाइजेशन अच्छा नहीं होगा और उदर रोग हो सकता है ।

✅ संक्रमण :पेट और आंतों में बैक्टीरिया या वायरस संक्रमण होने से भी उदर रोग होता है या पेट दर्द होता है ।

✅ आधारभूत स्वास्थ्य समस्याएं: अल्सर आईबीएस की बीमारी या एसिडिटी की बीमारी ।

उपचार और प्रबंधन:

आहार में बदलाव फाइबर फल और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार ।

जल योजन पानी अधिक पीना ताकि शरीर में जल की कमी ना हो ।

हर्बल उपचार अदरक पुदीना और हल्दी जैसे हब्स सहायक हो सकते हैं ।

दवाइयां राहत के लिए एंटासिड या चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाइयां लेना चाहिए ।

तनाव प्रबंधन योग और ध्यान जैसी प्रेक्टिस से तनाव कम किया जा सकता है जिससे उदार रोग की समस्या कम हो जाएगी और पाचन से संबंधित समस्याएं कम होने लगेंगे ।

अत्यधिक मसालेदार या तला भुना भोजन खाने से बचें lपानी अधिक पिए और शराब या धूम्रपान से बचें ।

नियमित रूप से व्यायाम करें ताकि पाचन में मदद मिल सके ।

ज्यादा से ज्यादा कोशिश करना चाहिए की रात में हल्का और सुपाच्य भोजन ही करना चाहिए ।

तनाव कम करने के लिए विश्राम तकनीक का अभ्यास करें या ध्यान करके भी पेट दर्द जैसी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं ।

रात में सोने के 2 घंटे पहले ही हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए जो आसानी से पच जाए ।

पथ्य (लाभकारी आहार)

हल्का और पचने में आसान भोजन चावल अच्छी तरह से पकाया हुआ ।

स्टीम किए हुए सब्जियां जैसे (गाजर, कद्दू और तोरी) ।

सूप ओट्स और दलिया मीठे फल जैसे सेब ,नाशपाती ,पपीता ।

ताजे नारियल पानी तरबूज जैसे फल ।

मसाले और जड़ी बूटियां अदरक ,जीरा ,धनिया ,सौंफ ,और हल्दी lखमीर युक्त आहार घर का बना दही, छाछ गर्म पानी और घी या घी का सीमित सेवन पाचन को बेहतर बनाता है ।

अपथ्य (बचने योग्य खान पान/आहार):

1:भारी तला होना और अत्यधिक तेलिय भोजन अत्यधिक तीखा या लाल मिर्च वाला भोजन पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं इसलिए ऐसे भोजन से जिससे पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं ।

2:मसालेदार और तीव्र भोजन मिर्च तीव्र सॉस और अधिक मसालेदार खाद्य पदार्थ पेट की आंतरिक परत को उत्तेजित कर सकते हैं और असहजता के कारण बन सकते हैं जिससे उदर रोग की समस्या हो सकती है ।

3:दूध उत्पादन का अत्यधिक सेवन हालांकि थोड़ी मात्रा में दही लाभकारी होता है लेकिन अधिक मात्रा में दूध पनीर और क्रीम से गैस और सूजन हो सकती है जिससे पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं इसलिए इनका अत्यधिक सेवन करने से बचें ।

4:पैक किए गए या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बच्चे ज्यादा से ज्यादा ताजा खाने का इस्तेमाल करें पैकेट वाली चीजों और बाजार में मिलने वाली कई समय तक कई महीनो तक रखी रहने वाले पैक्ड फूड से बचने की कोशिश करें ।

5:कॉफी, कड़क चाय और एनर्जी ड्रिंक एसिडिटी और पाचन में असुविधा उत्पन्न कर सकते हैं इसलिए इनका काम से कम मात्रा में सेवन करें ।

6:शराब से बचना चाहिए क्योंकि यह सूजन का कारण बन सकती है और उधर रोक के लक्षणों को भी बढ़ा सकती है ।

उधर रोक से बचाव:

1:आयुर्वेद का सिद्धांत यह है की रोकथाम इलाज से बेहतर है इसलिए कोशिश करना चाहिए कि उदर रोग के मामले में निवारण पहले बहुत महत्वपूर्ण है यहां उदर रोग से बचाव के कुछ उपाय दिए गए हैं:

2:मानसिक कर्म से बचाव ।

3:स्वस्थ आहार हल्का भोजन ,फलों, सब्जियों ,साबुत अनाज, लीन प्रोटीन ,और स्वस्थ वास से भरपूर संतुलित आहार पर ध्यान दें ।

4:नियमित व्यायाम करें ।

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